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Rakshanda Jalil at Jaipur Literature Festival says Urdu is not just the language of Muslims | जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में बोलीं रक्षंदा जलील


Jaipur Literature Festival: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 के पहले दिन में भारतीय लेखिका, अनुवादक, आलोचक और साहित्यिक इतिहासकार रक्षंदा जलील पहुंची. इस दौरान उन्होंने ‘बाल-ओ-पार: एकत्रित कविताओं’, गुलज़ार की जिदंगी समेत कई मुद्दों पर बात की. एबीपी लाइव से बात करते हुए उन्होंने कहा कि गुलज़ार साहब का किरदार बिल्कुल अलहदा है. उनके किरदार के लिए कोई शब्द है तो ‘इंडिविजुअलिस्ट’ है. वो बच्चों की तरह दुनिया को देखते हैं और यही उनको सभी से अलग करता है.

गुलज़ार की शायरी पर बात करते हुए रक्षंदा जलील ने कहा कि शायरी के लिए अल्फाज जरूरी है, उसके लिए मानी भी जरूरी है लेकिन एक चीज जिसके बिना शायरी नहीं हो सकती वो है इमेज. गुलज़ार साहब की इमेज बहुत बदलती रहती है. वो इसलिए खूबसरत है. वो हर तरह की बात कह सकते हैं. 

ये सिर्फ मुसलमानों की जबान बिल्कुल नहीं है

उर्दू ज़बान पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उर्दू ही नहीं हर जबान बोलने वाले को उसकी जबान सबसे अच्छी लगती है. तमिल बोलने वाले को तमिल तो किसी और वो जो भाषा बोलता है वो पसंद आएगी. ऐसा ही उर्दू के साथ भी है. हां कुछ लोगों को उर्दू से ऐतराज है लेकिन मैं ऐसा नहीं मानती हूं. ये सिर्फ मुसलमानों की जबान बिल्कुल नहीं है. 

आज नफरत को बहुत ही नॉर्मल बना दिया है

लव इन दी टाइम ऑफ हेट में हम इन चीजों को एड्रेस कर रहे हैं जिसने आज नफरत को बहुत ही नॉर्मल बना दिया है. आज के दौर में बहुत सारे लफ्ज उछाले जा रहे हैं जिनका कोई मतलब नहीं है. आज आप लव जिहाद जैसे शब्द सुनते होंगे जिसका कोई मतलब नही है. जगहों को नाम बदले जा रहे हैं. हम राजनीति समेत इन्हीं मुद्दों को इसमें उठा रहे हैं.

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