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No-confidence Motion Decide On Which Issues Will Be Election Battle In 2024 For Opposition INDIA Vs NDA Manipur Violence China Nationalism


No-Confidence Motion: अगले साल यानी 2024 में आने वाले लोकसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है, विपक्षी दलों ने बीजेपी को हराने के लिए एकजुट होकर नया गठबंधन INDIA बनाया है, वहीं बीजेपी ने भी एनडीए के तमाम सहयोगी दलों के साथ मिलकर अपनी ताकत दिखाई है. इस बीच विपक्ष उन मुद्दों को बड़ा करने की कोशिश कर रहा है, जिन्हें 2024 के चुनावी मैदान में सरकार के खिलाफ एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा. संसद में पेश किया गया अविश्वास प्रस्ताव भी इसी का एक उदाहरण है, जिसके जरिए सरकार को कुछ कदम पीछे धकेलने की कोशिश की गई है. 

विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव
दरअसल मणिपुर हिंसा को लेकर पीएम मोदी के भाषण की विपक्ष की लगातार मांग के बीच लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया. जिस पर मंगलवार 8 अगस्त को चर्चा शुरू हुई. जिसके जरिए पीएम मोदी को बोलने के लिए मजबूर किया जा रहा है. हालांकि अब तक ये साफ नहीं है कि पीएम खुद इस मसले पर बोलेंगे या नहीं. 

संसद के जरिए सरकार पर निशाना
दरअसल विपक्ष संसद जैसे मंच का इस्तेमाल लोकसभा चुनाव से पहले तमाम ज्वलंत मुद्दों को उठाने और सरकार की नाकामियों को सामने लाने के लिए कर रहा है. फिलहाल मणिपुर के मुद्दे को सबसे बड़ा बनाने की कोशिश जारी है, विपक्ष चाहता है कि इस पर सरकार को जितना हो सके बैकफुट पर धकेला जाए. विपक्षी दलों की कोशिश है कि पूरे देशभर में बीजेपी के डबल इंजन वाले नारे को चोट पहुंचाई जाए और बताया जाए कि मणिपुर जैसे राज्य में डबल इंजन पूरी तरह से फेल हो गया. 

इन मुद्दों पर घेरने की तैयारी
मणिपुर के अलावा विपक्षी दलों ने संसद में चीन के साथ सीमा विवाद, बेरोजगारी, महंगाई, अर्थव्यवस्था, जांच एजेंसियों के दुरुपयोग, किसान आंदोलन, महिला सुरक्षा को लेकर भी सरकार को घेरने की योजना बनाई है. ऐसे तमाम मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा. हालांकि इस दौरान ज्यादातर बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में मौजूद नहीं थे.

बीजेपी के राष्ट्रवाद को टक्कर देगा INDIA?
विपक्षी दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी की राष्ट्रवादी छवि और हिंदुत्व को लेकर स्टैंड है. जिसे टक्कर देने के लिए विपक्ष भी अब नए-नए तरीके खोज रहा है. बताया जा रहा है कि गठबंधन का नाम INDIA रखना भी इसी के तहत एक रणनीति है. इसके अलावा आने वाले कुछ महीनों में विपक्षी दल राष्ट्रवाद को लेकर कई तरह की ऐसी ही रणनीति बना सकते हैं. 

मणिपुर पर चौतरफा घेरने की तैयारी
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि मणिपुर को आने वाले वक्त में विपक्ष एक बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है. पिछले कुछ हफ्तों में इसके लिए खूब मेहनत भी की गई, फिर वो चाहे राहुल गांधी का हिंसा प्रभावित इलाकों का दौरा हो, विपक्षी गठबंधन के सांसदों का मणिपुर जाना हो या फिर संसद में घेराव… ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ा गया, जहां सरकार को नहीं घेरा गया हो. 

डबल इंजन पर निशाना
संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत भी जोरदार रही, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सीधे सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला. उन्होंने सीधे कहा कि प्रधानमंत्री इस मामले पर तीन महीने से चुप्पी साधे हुए हैं, उन्होंने महज 30 सेकेंड इसे लेकर बोला. उन्हें सदन में स्वीकार करना होगा कि ये हमारी डबल इंजन सरकार की बड़ी नाकामी है. उन्होंने कहा कि अगर मणिपुर जल रहा है तो मतलब पूरा देश जल रहा है.

गौरव गोगोई के अलावा तमाम विपक्षी दलों के नेताओं ने भी अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार को जमकर घेरा, फिर चाहे वो राज्यों में सरकारें गिराने की बात हो या फिर सांप्रदायिक हिंसा और चीन का मुद्दा… ऐसे तमाम बड़े मुद्दों को उछालकर सरकार को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की गई. 

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