https://www.fapjunk.com https://pornohit.net london escort london escorts buy instagram followers buy tiktok followers Ankara Escort Cialis Cialis 20 Mg
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeIndiaMunawwar Rana Profile Famous Urdu Poet Passes Away His Poetry On Mother...

Munawwar Rana Profile Famous Urdu Poet Passes Away His Poetry On Mother Make Everyone Emotional To Emotional


Munawwar Rana Demise: मशहूर शायर मुनव्वर राना का रविवार (14 जनवरी) को लखनऊ के पीजीआई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. उन्होंने 71 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली. लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था. वह अपने पीछे गजलों की ऐसी विरासत छोड़ गए है जो मुशायरों में हमेशा उन्हें जिंदा रखेगी. यही नहीं, जब-जब मां पर कोई कविता कही जाएगी तो मुनव्वर राना की शायरी जरूर याद आएगी. वह कहते थे- 

उदास रहने को अच्छा नहीं बताता है, कोई भी जहर को मीठा नहीं बताता है
कल अपने आपको देखा था मां की आंखों में, ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है

किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकाँ आई
मैं घर में सब से छोटा था मिरे हिस्से में माँ आई

मुनव्वर राना ने देश और विदेशों में आयोजित मुशायरों में शिरकत करते थे और अपने बुलंद, खनकती आवाज में महफिल में जान फूंक देते थे, लेकिन मां को बयां करती उनकी पंक्तियां लोगों को आंखें नम कर देती थीं. वह कहते थे-

ऐ अंधेरे देख ले मुंह तेरा काला हो गया
मां ने आंखें खोल दीं घर में उजाला हो गया

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
मां बहुत गुस्से में होती है तो रो देती है

मुनव्वर राना अपने बेबाक अंदाज और बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहते थे. उनके कुछ बयानों पर विवाद भी हुआ. एक बार असहिष्णुता के मुद्दे पर उन्होंने पुरस्कार तक वापस कर दिया था.

‘शाहदाबा’ के लिए मिला था साहित्य अकादमी पुरस्कार

मुनव्वर राना का जन्म 1952 में उत्तर प्रदेश के रायबरेली में हुआ था लेकिन उन्होंने अपना अधिकांश जीवन कोलकाता में बिताया. उनकी एक रचना ‘शाहदाबा’ के लिए उन्हें 2014 में उर्दू भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. इससे पहले 2012 में उर्दू साहित्य में सेवाओं के लिए उन्हें शहीद शोध संस्थान की ओर से माटी रतन सम्मान से सम्मानित किया गया था.

हिंदी और अवधी का करते थे जमकर प्रयोग

वह हिंदी और अवधी शब्दों का प्रयोग करते थे और फारसी और अरबी से परहेज करते थे. यह उनकी शायरी को भारतीयों के लिए सुलभ बनाता था और गैर-उर्दू इलाकों में आयोजित कवि सम्मेलनों में उनकी लोकप्रियता को रेखांकित करता था. उनके ज्यादातर शेरों में प्रेम का केंद्र बिंदु मां है. उनकी उर्दू गजलों को तपन कुमार प्रधान ने अंग्रेजी में अनुवाद किया है.

 

RELATED ARTICLES

Most Popular