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How Rich And Poor Is India? Know The Wealth Distribution Inequality ABPP


भारत एक ऐसा देश है, जो अपनी विविधता के लिए मशहूर है. यहां ऊंचे-नीचे पहाड़, हरी-भरी वादियां, सुनहरे रेगिस्तान और नीला-छटा समंदर सब कुछ है. लेकिन इसी विविधता के बीच असमानता भी छिपी हुई है- किसी के पास बहुत कम धन, किसी के पास बहुत ज्यादा धन.

एक तरफ भारत की अरबपतियों की संपत्ति आसमान छू रही है, तो दूसरी तरफ करोड़ों लोग गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं. भारत की अर्थव्यवस्था निस्संदेह तेजी से बढ़ रही है. विश्व बैंक के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है.

2023-24 में भारत का जीडीपी 7.3 फीसदी बढ़ने का अनुमान है. मगर यह विकास देश की 140 करोड़ आबादी तक समान रूप से नहीं पहुंच रहा है. अमीर और गरीब के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है. भारत की प्रति व्यक्ति आय लगातार बढ़ रही है, मगर भारत में अभी भी गरीबी एक बड़ी समस्या है.

अमीर और गरीब के बीच बढ़ रहा फासला
देश में अमीर और गरीब के बीच का अंतर बढ़ता जा रहा है. ऑक्सफैम इंटरनेशनल की वार्षिक असमानता रिपोर्ट (Annual Inequality Report) के अनुसार, साल 2000 में सिर्फ 1 फीसदी लोगों के पास देश की 33 फीसदी संपत्ति थी. 2022 तक एक फीसदी अमीरों के पास देश की 40 फीसदी संपत्ति हो गई. इसका मतलब है कि भारत के कुछ सबसे अमीर लोग पूरे देश की करीब आधी संपत्ति के मालिक हैं.

रिपोर्ट में बताया गया है देश के 100 सबसे अमीर लोगों की संपत्ति 660 अरब डॉलर यानी कि करीब 55 लाख करोड़ है. कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन के कारण जहां लाखों लोगों का काम धंधा ठप हो गया था, वहीं अमीरों के संपत्ति में खूब इजाफा हुआ. अप्रैल 2020 से नवंबर 2022 तक देश के अरबपतियों की संपत्ति में 121 फीसदी का इजाफा हुआ. उनकी संपत्ति में हर दिन 3608 करोड़ रुपये बढ़ती चली गई. वहीं अरबपतियों की संख्या भी 102 से बढ़कर 166 हो गई.

असमानता का भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास पर गंभीर असर पड़ता है. असमानता के कारण गरीबी, भुखमरी, कुपोषण और बीमारी बढ़ती है. असमानता के कारण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कम हो जाती है. अमीरी और गरीबी के बीच का यह बड़ा अंतर कहीं न कहीं सामाजिक अशांति और अपराध को भी बढ़ावा देता है.

भारतीयों के पास कितनी निजी संपत्ति


ये बहस चलती रहती है कि कौन कितना अमीर है और कौन कितना गरीब. यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड (यूबीएस) ने पिछले साल ग्लोबल वेल्थ रिपोर्ट 2023 नाम से एक रिपोर्ट जारी की थी. इसके अनुसार, भारत में व्यस्कों की आबादी 65 फीसदी है. हर वयस्क भारतीय के पास एवरेज 16,500 डॉलर (करीब 13.70 लाख रुपये) की निजी संपत्ति है. जबकि कुल संपत्ति 15.4 ट्रिलियन डॉलर यानी कि करीब 1280 लाख करोड़ रुपये है.

भारतीयों के पास संपत्ति 8.7 फीसदी की दर से बढ़ रही है, जबकि दुनिया में ये दर 4.6 फीसदी है. पड़ोसी देशों में चीन, श्रीलंका, मालदीव के लोगों की संपत्ति भारत से ज्यादा है. चीन के वयस्कों की संपत्ति भारत से पांच गुना ज्यादा है. मालदीव में हर वयस्क के पास 21 लाख और श्रीलंका में 20 लाख रुपये की संपत्ति है. 

अनुमान है कि दुनियाभर में 2027 तक वयस्कों की निजी संपत्ति 38 फीसदी बढ़ सकती है. दुनिया में हर वयस्क के पास 1.10 लाख डॉलर (91 लाख रुपये) की निजी संपत्ति होगी. भारत और चीन अरबपतियों की संख्या दोगुनी होने का अनुमान है.

GDP के आधार पर भारत कितना अमीर देश
भारत की जीडीपी ग्रोथ से भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमारा देश कितना अमीर है. 2023 में भारत की जीडीपी 3.75 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई, तो प्रति व्यक्ति जीडीपी 2610 डॉलर हो गई. जीडीपी के हिसाब से अभी भारत 5वां सबसे अमीर देश है. 2027 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की तैयारी है. ऐसा होने पर भारत दुनिया का तीसरा सबसे अमीर देश होगा.

जीडीपी के आधार पर भारत की अर्थव्यवस्था वैसे तो पांचवीं अर्थव्यवस्था है लेकिन प्रति व्यक्ति जीडीपी के पैमाने पर 194 देशों की लिस्ट में भारत का स्थान 144वां है. एशियाई देशों की बात करें तो यहां भी इस लिस्ट में भारत 33वें नंबर पर है.

भारत में कितने लोग गरीब?
भारत में जितने ज्यादा लोग अमीर हैं, उससे कई गुना ज्यादा गरीब भी हैं. गरीबी वह व्यक्ति होता है जिनके लिए दो वक्त का भोजन जुटा पाना भी मुश्किल होता है. वो इतना कम कमाते हैं कि अपनी बुनियादी जरूरतों को भी पूरा नहीं कर पाते हैं. सरकार मानती है कि गांव में रहने वाला व्यक्ति अगर हर दिन 26 रुपये और शहर में रहने वाला व्यक्ति 32 रुपये खर्च नहीं कर पा रहा है तो वो व्यक्ति गरीबी रेखा से नीचे माना जाएगा.

हालांकि भारत में गरीबी का अनुपात लगातार गिर रहा है. आजादी के पहले 80 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही थी. अब करीब 17 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे है, यानी कि 23 करोड़ आबादी. देश की आबादी के 4.2 फीसदी लोग बेहद निर्धनता हालत में रहते हैं.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2005 के बाद अगले 15 सालों में 55 फीसदी लोग गरीबी से बाहर आए हैं. तब करीब 64.5 करोड़ लोग गरीबी में जी रहे थे. 2019-2021 में ये दर घटकर 16.4 फीसदी रह गई. यानी कि 15 सालों में 41.5 करोड़ लोग गरीबी के चंगुल से बाहर निकले. ये आंकड़ा बहुआयामी गरीबी सूचकांक (Multidimensional Poverty Index) में बताया गया है. 

भारत के सबसे ज्यादा गरीब राज्य बिहार (33.76%), झारखंड (28.81%), मेघालय (27.79%), उत्तर प्रदेश (22.93%), मध्य प्रदेश (20.63%), असम (19.35%), छत्तीगढ़ (16.37%), उड़ीसा (15.68%), नगालैंड (15.43%), राजस्थान (15.31%) हैं. रिपोर्ट के अनुसार बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां गरीबी में तेजी से गिरावट देखी गई.

कैसे कम होगा अमीर-गरीब का फासला?
भारत सरकार ने अमीर और गरीब के बीच असमानता को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं. मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में गांरटी से रोजगार के अवसर पैदा किए जाते हैं. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है. आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं. 

हालांकि, सरकार के इन प्रयासों के बावजूद असमानता कम करने के लिए और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है. एजुकेशन सिस्टम में सुधार करना, कौशल विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और बैंकों से ऋण तक पहुंच आसान बनाना कुछ ऐसे कदम हैं जो असमानता को कम करने में मदद कर सकते हैं. भारत की असमानता की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 

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