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Chief Justice of India DY Chandrachud Judges Should Free From Social Political Pressures


Supreme Court docket: भारत के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने रविवार (28 जनवरी) को कहा कि जजों को सामाजिक और राजनीतिक दबावों से आजाद रहना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के डायमंड जुबली समारोह में सेरेमोनियल बेंच की कार्यवाही को संबोधित करते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने ये बातें कहीं. डायमंड जुबली कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हिस्सा लिया. उन्होंने लोकतंत्र को मजबूत रखने में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को लेकर बात की. 

सुप्रीम कोर्ट की सेरेमोनियल बेंच में सभी 34 जज शामिल थे, जिनका नेतृत्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ करते हैं. इसमें देशभर के हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी शामिल थे. पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम में नागरिक-केंद्रित इंफोर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी पहल की शुरुआत की. इस मौके पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आदिश सी अग्रवाल ने सभा को संबोधित किया. 

सीजेआई ने जजों की व्यक्तिगत आजादी पर दिया जोर

चीफ जस्टिस ने कहा, ‘एक आजाद न्यायपालिका का मतलब असल में संस्था को कार्यकारी और विधायी शाखाओं से अलग करना नहीं है, बल्कि जजों के रूप में अपनी भूमिकाओं के दौरान व्यक्तिगत तौर पर जजों की आजादी भी है.’ उन्होंने कहा, ‘फैसला करने की कला सामाजिक और राजनीतिक दबाव और इंसानी पूर्वोग्रहों से मुक्त होनी चाहिए. लिंग, विकलांगता जैसे मुद्दों पर जजों को शिक्षित और संवेदनशील बनाने के लिए कोशिश की जा रही है.’

सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग केस दिखाता है नागरिकों का भरोसा

सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग बड़े मामलों को लेकर चीफ जस्टिस ने कहा, ‘हम खुद को आश्वस्त करना चाहते हैं कि अदालतों में आते केस नागरिकों के विश्वास को दिखाते हैं. हमें इसे लेकर खुद से कठिन सवाल करने की जरूरत है कि हमें इस पर क्या करने की जरूरत है.’ उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में 65,915 रजिस्टर्ड केस पेंडिंग पड़े हुए हैं. चीफ जस्टिस ने कहा कि हाल के सालों में सुप्रीम कोर्ट ने पेंडिंग मामलों को कम करने की दिशा में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया है.

2023 में दर्ज हुए 49,818 केस

सीजेआई ने बताया कि 2023 में कुल 49,818 मामले दर्ज किए गए. इस तरह अब तक दर्ज किए गए कुल मामलों में से 2,41,594 मामले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए गए और 52,221 मामलों का निपटारा किया गया. ये दर्ज किए गए मामलों की संख्या से ज्यादा है. उन्होंने आगे कहा कि मामलों की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग ने फाइलिंग और दोषों को ठीक करने के बीच के समय को कम कर दिया है.

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