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Dharmendra Pradhan Resign: NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने दो बार दिया था इस्तीफा! आखिर क्यों हुआ मंजूर? जानें

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से शनिवार (25 जुलाई 2026) को इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने कथित तौर पर NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान दो बार अपना पद छोड़ने की पेशकश की थी. हालांकि, सरकारी नेतृत्व ने दोनों बार उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और उनसे शिक्षा व्यवस्था में सुधारों पर काम जारी रखने को कहा. यह जानकारी सरकारी सूत्रों के हवाले से सामने आई है.

20 जुलाई को वरिष्ठ मंत्रियों की एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी. दावा किया जा रहा है कि इस बैठक में धर्मेंद्र प्रधान ने एक बार फिर इस्तीफा देने की पेशकश की थी. लेकिन सरकार ने उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया. नेतृत्व का मानना था कि सिर्फ इस्तीफा देना किसी समस्या का समाधान नहीं है. सरकार का विचार था कि किसी मंत्री का इस्तीफा देना सबसे आसान रास्ता हो सकता है, लेकिन असली जरूरत व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने और सुधार लागू करने की है. हालांकि इस पर आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है.

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कॉकरोच जनता पार्टी से बातचीत

हालांकि बाद में स्थिति बदल गई. सूत्रों के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ दूसरे दौर की बातचीत के बाद सरकार ने हालात का दोबारा आकलन किया. बताया गया कि संगठन ने 20 जुलाई के चलो संसद मार्च की तरह एक और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी. 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में कई छात्र घायल हुए थे, जिससे सरकार पहले से ही चिंतित थी. सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने भी सरकार को रिपोर्ट दी थी. इनमें आशंका जताई गई थी कि कुछ देश विरोधी तत्व इस आंदोलन और अशांति का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं.

सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की गई

रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल निगरानी के दौरान 400 से अधिक सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की गई. इनमें लगभग 100 इंस्टाग्राम अकाउंट ऐसे बताए गए जो कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे और भारत में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों को बढ़ावा देने या उनसे जुड़ी सामग्री साझा कर रहे थे. शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से कुछ अकाउंट पहले भी विभिन्न संवेदनशील मुद्दों के दौरान सक्रिय रहे थे. सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस के फेसियल रिकग्निशन सिस्टम ने 20 जुलाई से 24 जुलाई के बीच जंतर-मंतर और उसके आसपास मौजूद करीब 400 ऐसे लोगों की पहचान की थी, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है. बताया गया कि इनमें से कुछ लोग 20 जुलाई को हुई तोड़फोड़ की घटनाओं से भी जुड़े होने के संदेह में थे.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया

इन सभी घटनाक्रमों और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद सरकार ने स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया. सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस निष्कर्ष पर पहुंची कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और तनाव कम करना जरूरी है. इसी बीच धर्मेंद्र प्रधान ने एक बार फिर इस्तीफा देने का फैसला किया. बाद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया. इसके कुछ ही घंटों बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया.

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यूक्रेन में फिर हुआ भारतीय जहाज पर हमला, 2 क्रू मेंबर लापता, दूतावास ने क्या बताया?

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यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह पर रविवार (26 जुलाई) को 4 भारतीय नागरिकों को ले जा रहे एक व्यापारी जहाज पर हमला हुआ. कीव में भारतीय दूतावास के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, चालक दल के 2 सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं, जबकि बाकी 2 के बारे में जानकारी का अभी भी इंतजार है.

दूतावास के बयान के मुताबिक यह घटना शनिवार को हुई, जब ओडेसा बंदरगाह पर MV AGN Ragnar पर हमला हुआ. ओडेसा यूक्रेन के अहम ब्लैक सी बंदरगाहों में से एक है, जिस पर 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से कई बार हमले हुए हैं. भारतीय मिशन ने एक बयान में कहा है कि वह स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है. बता दें कि यह घटना ओडेसा बंदरगाह पर रूसी हमले में 4 भारतीय नाविकों की मौत के कुछ दिनों बाद हुई है.

एजेंसियों के संपर्क में दूतावास 
यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित भारतीय दूतावास ने रविवार को बताया कि जहाज पर मौजूद दो भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं, जबकि अन्य दो भारतीयों के बारे में जानकारी का इंतजार किया जा रहा है. दूतावास ने कहा कि वह स्थानीय अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है तथा भारतीय नागरिकों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है. घटना को लेकर आगे की जानकारी का इंतजार है.

हाल ही में हुई 4 भारतीय नाविकों की मौत 
हाल ही में यूक्रेन के तट के पास एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले में 4 भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जबकि 1 अन्य भारतीय गंभीर रूप से घायल हुआ. इस घटना के बाद भारत ने रूस के प्रभारी राजदूत को तलब कर इस हमले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया था. विदेश मंत्रालय ने रूसी राजनयिक से साफ तौर पर कहा कि जिस तरह एक व्यापारी जहाज पर हमला हुआ और उसमें भारतीय नागरिकों की जान गई, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है.

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असम के गुवाहाटी में कथित परीक्षा अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए छात्र प्रदर्शन ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है. इस प्रदर्शन में असम सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री और असम गण परिषद (एजीपी) नेता केशव महंत की बेटी दिबिसा के शामिल होने के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है. सोशल मीडिया पर दिबिसा के प्रदर्शन में शामिल होने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे लगाने के कथित वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं. इस पूरे घटनाक्रम पर अब मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी प्रतिक्रिया दी है.

मंत्री की बेटी के प्रदर्शन में शामिल होने के वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में दावा किया जा रहा है कि दिबिसा छात्र प्रदर्शन में शामिल हुईं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी नारे लगाए. हालांकि, वायरल वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.

 

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने किया मंत्री का बचाव

वीडियो सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं. इस बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपने कैबिनेट सहयोगी केशव महंत के समर्थन में सामने आए. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सरमा ने कहा कि दिबिसा के प्रदर्शन में शामिल होने के कारण केशव महंत को ट्रोल करना या उन पर हमला करना उचित नहीं है. उनका कहना था कि वयस्क बच्चों की राजनीतिक सोच अपने माता-पिता से अलग हो सकती है.

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि अपनी बेटी के प्रदर्शन के कारण केशव महंत पर हमला या उन्हें ट्रोल किया जाना चाहिए. हो सकता है कि उनकी बेटी अपने पिता की राजनीतिक विचारधारा का पालन नहीं करती हो. कल जब मेरा बेटा वकालत करेगा तो संभव है कि वह किसी ऐसे व्यक्ति का पक्ष रखे, जिसे मैं पसंद न करता हूं.”

‘बच्चों के फैसलों के लिए माता-पिता जिम्मेदार नहीं’

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े हो चुके बच्चों के राजनीतिक फैसलों या सार्वजनिक गतिविधियों के लिए उनके माता-पिता को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि जब बच्चे वयस्क हो जाते हैं तो उन्हें अपने निर्णय लेने का पूरा अधिकार होता है और उन फैसलों को उनके माता-पिता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

नारों से असहमति जताई, दिबिसा से करेंगे बात

हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि वह प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों से सहमत नहीं हैं. उन्होंने कहा, “मैं उन नारों से सहमत नहीं हूं जो उन्होंने लगाए. अगली बार जब मेरी उनसे मुलाकात होगी तो मैं जरूर इस बारे में बात करूंगा और उन्हें समझाने की कोशिश करूंगा कि उन्होंने जो कहा, वह सही नहीं था.”

परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में हुआ था प्रदर्शन

गुवाहाटी में यह प्रदर्शन कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में आयोजित किया गया था. प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की. इस पूरे मामले पर अब तक केशव महंत की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.



सड़क के बाद अब संसद में होगा बवाल! केसी वेणुगोपाल ने पीएम मोदी से की माफी की मांग

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कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष संसद में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कथित पुलिस बर्बरता के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है. सूत्रों के अनुसार विपक्ष इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक माफी की मांग करेगा.

विपक्ष का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया, जिसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए. इस मुद्दे को संसद के दोनों सदनों में जोर-शोर से उठाने की रणनीति बनाई गई है. इस मामले को लेकर कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने दिल्ली में कथित NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी मांगने की मांग की है.

PTI के मुताबिक, केसी वेणुगोपाल ने रविवार (26 जुलाई) को कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा 27 जुलाई को संसद में उठाया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की गई और प्रदर्शनकारियों के साथ हुई कार्रवाई पर जवाबदेही तय होनी चाहिए. NEET परीक्षा से जुड़े आरोपों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है.

राहुल गांधी ने अमित शाह को लिखा लेटर
इससे पहले राहुल गांधी ने अमित शाह को लेटर लिखकर छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा है. राहुल गांधी ने कहा कि हमारे छात्र एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली की मांग कर रहे थे. उनकी बात सुने जाने के बजाय सुरक्षा बलों ने हथियारों और आंसू गैस सहित अंधाधुंध बल प्रयोग करके उन पर हमला किया.

राहुल गांधी ने अमित शाह से सवाल किए कि दिल्ली में तैनात सुरक्षा बल अंतिम रूप से आपके प्रति ही जवाबदेह हैं, इसलिए मैं आपसे पूछता हूं कि एक गृह मंत्री के रूप में क्या आपने छात्रों के खिलाफ पेलेट गन सहित घातक बल प्रयोग को मंजूरी दी थी? यदि नहीं, तो किसने दी? मतलब साफ है कि सोमवार को संसद में जोरदार हंगामा देखने को मिलने वाला है.

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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में आयोजित एक सभा के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह देश के युवाओं के संघर्ष, मेहनत और लंबे आंदोलन की बड़ी जीत है. ओवैसी ने कहा कि छात्रों ने लगातार आवाज उठाई और आखिरकार सरकार को उनके सामने झुकना पड़ा.

ओवैसी ने कहा कि वह उन छात्रों को सलाम करते हैं, जिन्होंने कई हफ्तों तक जंतर-मंतर पर बैठकर आंदोलन किया. उन्होंने कहा कि छात्रों ने ऐसा मंत्र पढ़ा की  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी देर रात वीडियो संदेश जारी करना पड़ा. ओवैसी ने कहा कि देश में तानाशाही नहीं चल सकती और जब लोग संगठित होकर अपनी आवाज उठाते हैं तो सत्ता को भी उनकी बात सुननी पड़ती है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं होंगी और छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था मिलेगी.

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राजनीतिक मुद्दों पर ओवैसी की राय

सभा के दौरान ओवैसी ने राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि अब लोग केवल प्रतीकात्मक सम्मान नहीं चाहते, बल्कि बराबरी का अधिकार चाहते हैं. उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्गों को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि AIMIM नहीं चाहती कि भारतीय जनता पार्टी दोबारा सत्ता में आए. ओवैसी ने कहा कि वह विपक्षी दलों के साथ हाथ मिलाने और गठबंधन करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने विपक्षी नेताओं से अपील करते हुए कहा कि अभी बातचीत का समय है और चुनाव खत्म होने के बाद पछताने का कोई फायदा नहीं होगा.

देश की राजनीति में युवाओं की भूमिका

ओवैसी ने यह भी कहा कि देश की राजनीति में युवाओं की भूमिका और बढ़नी चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत की बड़ी आबादी युवा है और भविष्य की राजनीति में उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण होगी. उनके अनुसार एआईएमआईएम का उद्देश्य केवल भाषण देना नहीं, बल्कि जनता के असली मुद्दों को उठाना और उनके अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करना है. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय कई नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं और मुख्यमंत्री या सरकार बनाने की बातें करते हैं, लेकिन जनता को अपनी नेतृत्व क्षमता विकसित करनी चाहिए और अपने प्रतिनिधियों को मजबूत बनाना चाहिए.

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सिद्धारमैया ने किया 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान, बोले – ‘आज की राजनीति…’

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कर्नाटक की सियासत को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रहे और कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता सिद्धारमैया ने 2028 का विधानसभा चुनाव न लड़ने का ऐलान किया है. उन्होंने इसकी जानकारी एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दी है. 

उन्होंने कहा, ‘मैं 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा. मैं अब 79 साल का हो गया हूं. हमारी सरकार का कार्यकाल अभी डेढ़ साल और बाकी है. तबतक मैं 81-82 साल का हो जाऊंगा. मेरी सेहत अब वैसी नहीं रही, जैसी पहले हुआ करती थी. अब पहले जैसा जोश और उत्साह के साथ काम करना मुमकिन नहीं है.’

आज राजनीति में भ्रष्टाचार आ गया है, इसलिए नहीं लड़ूंगा चुनाव: सिद्धारमैया

सिद्धारमैया मांड्या जिले के के.आर. पेट में शनिवार को आयोजित एक निजी कार्यक्रम में बोल रहे थे. सिद्धारमैया ने ऐलान करते हुए कहा, ‘आज राजनीति में भ्रष्टाचार आ गया है. इसलिए मैं 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ूंगा. हालांकि, राजनीति में एक्टिव रहते हुए, मैं लोगों के दुख-सुख की आवाज बनता रहूंगा.’

उन्होंने कहा, ‘वरुणा निर्वाचन क्षेत्र के लोग एक बार मुझसे चुनाव लड़ने का आग्रह कर रहे हैं. लेकिन मैंने तय किया है कि अब मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा. पहले जब मैं चुनाव लड़ता था, तो निर्वाचन क्षेत्र के लोग ही हमें पैसे देते थे. हमारी जीत सुनिश्चित करते थे, लेकिन आज वैसी स्थिति नहीं रही.’

उन्होंने उम्र का हवाला देते हुए कहा, ‘मैं अब 79 साल का हो गया हूं. हमारी सरकार का कार्यकाल अभी डेढ़ साल और बाकी है. तब तक मैं 81-82 साल का हो जाऊंगा. मेरी सेहत अब वैसी नहीं रही जैसी पहले हुआ करती थी. अब पहले जैसा जोश और उत्साह के साथ काम करना संभव नहीं है.’

उन्होंने कहा, ‘2028 तक मैं 82 साल का हो जाऊंगा. तब मेरे राजनीतिक जीवन के 50 साल पूरे हो जाएंगे. मैंने 1978 में तालुक बोर्ड सदस्य के तौर पर अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था. मैंने हार और जीत, दोनों देखी हैं. लेकिन मुझे इस बात का संतोष है कि मैंने कभी उन सिद्धांतों के खिलाफ काम नहीं किया जिनमें मेरा विश्वास था, और न ही कभी अपनी अंतरात्मा के साथ धोखा किया.’

उन्होंने कहा, ‘अब ऐसा समय आ गया है कि अगर हम चुनाव लड़ते हैं, तो हमें लोगों को पैसे देने होंगे. आज की राजनीति पूरी तरह से भ्रष्ट हो चुकी है. ईमानदार राजनीति के लिए कोई जगह नहीं बची है. इसी माहौल को देखते हुए, मैंने भविष्य में चुनाव न लड़ने का फैसला किया है. पांच दशकों तक राज्य की जनता ने मुझे अपने ही बीच का एक व्यक्ति माना और प्यार से मेरा मार्गदर्शन किया. मुझ पर उनका यह कर्ज है. इसलिए, मेरा भविष्य का जीवन भी जनसेवा को ही समर्पित रहेगा.’



Li Meizhen Finishes 42 Km Marathon Despite Period Pain Video Gone Viral who is Li Meizhen periods running video

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Li Meizhen Periods Running Video: अक्सर देखने के लिए मिलता है कि महिलाओं को मासिक धर्म के समय पर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब इसी बीच घुटने टेकने की बजाय चीन की ली मेइझेन ने जो किया उसने पूरी दुनिया का दिल जीत लिया।

Li Meizhen Periods

हेंगशुई लेक मैराथन के दौरान रेस के बीच में ही उन्हें अचानक से पीरियड्स शुरू हो गए थे। दर्द के बावजूद भी उन्होंने दौड़ने का फैसला लिया और 42 किलोमीटर की लंबी रेस को सफलतापूर्वक पूरा भी किया।

रेस के बीच में ही शुरू हुआ था दर्द

ली मेइझेन अभी सिर्फ 25 साल की है और आपको बता दें कि जब रेस ट्रैक पर वह गई तो वह सिर्फ अपनी दौड़ पर ही फोकस करना चाहती थी। लेकिन रस के आखिरी कुछ किलोमीटर के वक्त उन्हें अचानक से पीरियड्स शुरू हो गए।

इसी के साथ-साथ उन्हें पेट में तेज दर्द और ऐंठन होने लगी। जहां ऐसा दर्द होने पर आम इंसान के लिए चलना भी है मुश्किल हो जाता है तो वही ली मेइझेन ने हार ना मानकर आगे बढ़ने का फैसला लिया।

दर्द को पीछे छोड़ बनी मिसाल

ली मेइझेन ने अपनी शारीरिक दिक्कतों को लेकर हर नहीं मानी और जमकर अड़ी रही। दर्द होने और बहते खून के बीच में उन्होंने अपनी रेस में रफ्तार को कम नहीं किया। साथ ही सिर्फ 2 घंटे 35 मिनट 7 सेकंड में ही उन्होंने 42 किलोमीटर की दौड़ पूरी कर ली। जिसके लिए उन्हें महिला वर्ग में 16वां स्थान मिला।

सोशल मीडिया पर भी लोगों ने की तारीफ

रेस पूरी करने के बाद में ली मेइझेन की तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल होती हुई नजर आ रही है। काफी सारे लोग उनकी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं और खेल प्रेमियों द्वारा कहा जा रहा है कि महिलाएं अपनी मानसिक मजबूती और इच्छा शक्ति से कुछ भी कर सकती हैं।

CJP-लेफ्ट के प्रदर्शन में पत्रकारों पर हुए हमलों पर बोले CM शुभेंदु अधिकारी, ‘ये छात्र नहीं, बल्कि…’

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  • सात मामले दर्ज, 14 गिरफ्तार; मुख्यमंत्री ने कट्टरपंथी बताया.

नीट परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों और युवाओं के भारी प्रदर्शन के साथ-साथ देश के कई राज्यों में भी बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन हुए. इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी नीट पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या के विरोध में भारी प्रदर्शन किया गया, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के साथ-साथ लेफ्ट गुट के लोग भी शामिल हुए. वहीं, कोलकाता में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह वामपंथियों का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह सेल्फ-डिक्लेयर्ड कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन था. जिसमें बाद में वामपंथी भी शामिल हो गए.

नीट आंदोलन में शामिल लोग, हमले में शामिल नहीं थे- मुख्यमंत्री

सीजेपी-लेफ्ट छात्र प्रदर्शन के दौरान मीडिया कर्मियों पर हुए हमलों को लेकर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नाराजगी जताई. शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘जो भी लोग नीट आंदोलन से जुड़े थे, उनमें से कोई भी इस घटना (मीडिया कर्मियों पर हमले) में शामिल नहीं है. मैंने खुद देखा है. उन्होंने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लिखा है कि पत्रकारों पर हुए इन बर्बर हमलों की जिम्मेदारी वो नहीं ले रहे हैं.’ 

उन्होंने कहा, ‘कोलकाता पुलिस कमिश्नर ने मुझे पूरी रिपोर्ट भेजी थी, जिन्हें मैंने खुद देखा है. यह पूरी तरह से विदेशी ताकतों की तरफ से प्रायोजित भी हो सकता है. इसकी पुष्टि जांच एजेंसियां ही कर सकेंगी.’ 

अब तक सात मामले दर्ज और 14 लोग गिरफ्तार- मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘जिस तरह से मीडिया कर्मियों की हत्या करने को कोशिश की गई, उनका खून बहाने और उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई, उसे लेकर अब तक सात मामले दर्ज किए गए हैं. ये सभी मामले पत्रकारों की शिकायतों पर दर्ज किए गए हैं. वहीं, पुलिस ने भी अपनी ओर से कुछ मामलों को दर्ज किया है.’ 

उन्होंने कहा, ‘मैं तुरंत पीजी अस्पताल गया. पत्रकार ने एफआईआर दर्ज कराई और मेडिकल टेस्ट भी कराया. अभी तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. उनका कॉकरोच जनता पार्टी के नीट आंदोलन से कोई वास्ता नहीं है. ये छात्र नहीं है. ये पूरी तरह से जमाती, कट्टरपंथी है, जो भारत को कमजोर और अस्थिर करना चाहते हैं.’ 

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Karishma Tanna flaunts huge grown baby bump romancing with husband varun banger intimate photos viral

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Karishma Tanna Pregnancy Romance: बॉलीवुड अभिनेत्री करिश्मा तन्ना इन दिनों अपनी पहली प्रेग्नेंसी के आखिरी फेज में आ चुकी हैं। एक्ट्रेस की डिलीवरी काफी करीब है जिसके लिए उनके परिवार के साथ साथ उनके फैंस भी काफी एक्साइटेड हैं। इसी बीच करिश्मा तन्ना ने अपने पति के साथ कुछ प्यार भरे लम्हों की तस्वीरें शेयर की हैं जो कि काफी तेजी से वायरल हो रही हैं।

Karishma Tanna

प्रेग्नेंसी के दौरान करिश्मा तन्ना के पति वरुण बंगेरा उन्हें फुल पैंपर करते दिखाई दे रहे हैं। दरअसल, हसीना ने हाल ही में अपने पति के साथ अपना बड़ा सा बेबी बंप फ्लॉन्ट करते हुए मैटरनिटी फोटोशूट कराया है जो कि काफी तेजी से वायरल हो रहा है।

करिश्मा तन्ना इस फोटोशूट में बेहद खुद दिखाई दे रही हैं साथ पति के साथ जमकर रोमांटिक पोज देती नजर आ रही हैं। बता दें कि करिश्मा अपने फुल प्रेग्नेंसी पीरियड के दौरान एक्टिव रही हैं। हर दिन उन्हें वर्कआउट के लिए जिम आते जाते देखा गया।

करिश्मा तन्ना की ये मैटरनिटी फोटोशूट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही हैं और नेटिजंस इसपर दिल खोलकर लाइक और कमेंट की बरसात कर रहे हैं इसके साथ ही कुछ यूजर्स करिश्मा से इस दौरान की और भी तस्वीरें और वीडियो की डिमांड कर रहे हैं।

बता दें कि करिश्मा तनान और वरुण बघेरा ने फरवरी 2022 में शादी की थी। शादी के चार सालों बाद इस कपल ने फैमिली प्लानिंग की है। करिश्मा तन्ना की उम्र 42 साल है और ऐसे में उनके इस फैसले से उनके फैंस काफी खुश दिखाई दे रहे हैं।

ब्लैक सी में भारतीय नाविकों की मौत के बाद सरकार का एक्शन, जारी की एडवाइजरी, कहा – ‘बहुत सावधानी…’

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सरकार ने रविवार (26 जुलाई) को एक एडवाइजरी जारी की है. यह एडवाइजरी ब्लैक सी में कमर्शियल जहाजों से जुड़े कर्मचारियों और नाविकों से जुड़ी है. एडवाइजरी में सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है. इसमें इंश्योरेंस कवरेज और इमरजेंसी इंतजाम शामिल हैं. एडवाइजरी कमर्शियल जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों में पांच भारतीयों की मौत के बाद दी गई है. 

विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि संघर्ष के कारण इस इलाके और आसपास के समुद्री इलाकों में सुरक्षा की स्थिति बहुत अस्थिर है. एडवाइजरी के मुताबिक, इन इलाकों में चलने वाले यहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को मिसाइल और ड्रोन हमलों सहित सुरक्षा के बड़े खतरों का सामना करना पड़ रहा है. 

अप्रैल के बाद से लगातार हमलों में हुई है बढ़ोतरी

अप्रैल के बाद से लगातार हमलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है. अबतक पांच भारतीयों की मौत हो चुकी है. ऐसे में उन इलाकों में चलने वाले कमर्शियल जहाजों पर काम करने के इच्छुक भारतीय नागरिकों सलाह दी गई है. इसमें कहा गया है कि वे ऐसे काम स्वीकार करने से पहले मौजूदा सुरक्षा खतरों का सावधानीपूर्वक आकलन करें. 

एडवाइजरी में कहा गया है कि जो नाविक इस इलाके में काम करना चुनते हैं, उन्हें बहुत सावधानी बरतना चाहिए. अन्य सावधानियां भी लेना चाहिए. इनमें साफ तौर पर कहा गया है कि नियोक्ता, भर्ती एजेंसियों और जहाज ऑपरेटरों से जहाज के रूट, रुकने की जगहों, सुरक्षा इंतजामों, इंश्योरेंस कवरेज और इमरजेंसी रिस्पॉन्स के बारे में पूरी जानकारी लेना शामिल है. 

एडवाइजरी में कहा- नौकरी की शर्तें इंटरेनशनल मैरिटाइम गाइडलाइन के तहत हो

एडवाइजरी की मानें तो यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उनकी नौकरी की शर्तें इंटरनेशनल मैरिटाइम गाइडलाइन के अनुरूप हो. उनमें इमरजेंसी की स्थिति में मेडिकल सुविधाएं, इवैक्यूएशन, स्वदेश वापसी और मुआवजे के लिए पर्याप्त प्रावधान हों. नाविकों को अपने परिवार को अपनी यात्रा की योजना के बारे में जानकारी देना चाहिए. नियमित संपर्क बनाए रखना चाहिए. उन्हें डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मैरीटाइम एडमिनिस्ट्रेशन और अन्य सरकारी अधिकारियों की एडवाइजरी और जहाजों ऑपरेटरों और समुद्री अधिकारियों की तरफ से जारी सुरक्षा निर्देशों पर नजर रखना चाहिए. उनका पालन करना चाहिए. 

एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों को बहुत सावधानी बरतने की हिदायत

एडवाइजरी में बहुत ज्यादा सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है. अबतक भारत के क्रू मेबर वाले विदेश झंडे वाले जहाजों पर 10 हमले हो चुके हैं. 19 जुलाई को ओडेसा बंदरगाह से निकलते समय MV गोल्डन लियो पर कई मिसाइलों से हमला हुआ. इसमें मारे गए 10 लोगों में चार भारतीय नाविक भी शामिल थे. 

18 जुलाई को काला सागर से गुजरते समय बल्क कैरियर एमवी ओमोर्फी पर हमले में एक और भारतीय नाविक की मौत हो गई. रूस में नोवोरोसिस्क के पास विदेशी झंडे वाले टैंकरों एमटी लुईस-1, एमटी एशिया और एमटी नेल्सा पर हमले हुए. इन सभी में भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे. इन भारतीय नाविकों को कांसुलर मदद की जरूरत है. वे इस इलाके में मौजूद भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावासों से संपर्क कर सकते हैं. इमरजेंसी संपर्क नंबर इस प्रकार हैं. रूस में भारतीय दूतावास: +7 9652773414; यूक्रेन में भारतीय दूतावास: +38 0933559958 के लिए ये नंबर जारिए किए गए हैं. 

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