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आप चूक गई या बीजेपी ने बैलेट लूट लिया…3 प्वॉइंट्स में समझिए चंडीगढ़ के मेयर चुनाव में क्या हुआ?



<p fashion="text-align: justify;">मंगलवार यानी 30 जनवरी को चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के मनोज सोनकर की जीत हुई और ‘इंडिया’ गठबंधन को ज्यादा पार्षद होने के बाद भी हार का सामना करना पड़ा. चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 16 और कांग्रेस-आप गठबंधन को 12 वोट मिले.&nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;">अब क्योंकि आम चुनाव से कुछ ही महीने पहले पहली बार इंडिया गठबंधन और बीजेपी आमना सामना आई थी, इसलिए इस नतीजे से गठबंधन के नेता नाराज हैं. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों के पार्षद धरने पर बैठ गए.&nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;">इतना ही नहीं गठबंधन ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव का बहिष्कार तक कर दिया. इसके साथ ही उन्होंने मेयर के रिजल्ट को लेकर हाई कोर्ट का रुख करने का फैसला किया है.</p>
<p fashion="text-align: justify;"><sturdy>क्यों नाराज हैं गठबंधन के पार्षद</sturdy></p>
<p fashion="text-align: justify;">दरअसल चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 सीटें हैं. चुनाव से पहले बीजेपी के 14 पार्षद थे, केजरीवाल की आप के पास 13. वहीं कांग्रेस के पास 7 और शिरोमणि अकाली दल का 1 पार्षद थे.&nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;">इसका मतलब हुआ ये की आप-कांग्रेस साथ मिलकर चुनाव लड़ रही थी तो इंडिया गठबंधन के पास बीजेपी से ज्यादा यानी 20 पार्षद थे.&nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;">अब सवाल ये उठता है कि ज्यादा संख्या होने के बाद भी कांग्रेस-AAP का गठबंधन चंडीगढ़ मेयर चुनाव कैसे हार गया, इस रिपोर्ट में जानते हैं…&nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;"><sturdy>1. संख्या कम फिर भी कैसे जीती बीजेपी</sturdy></p>
<p fashion="text-align: justify;">इसे आसान भाषा में समझें तो मेयर पद पर जीत हासिल करने के लिए किसी भी पार्टी के लिए जीत का जादुई आंकड़ा 19 होता है. इसके अलावा चंडीगढ़ का सांसद भी मेयर चुनाव में वोट डालता है. यानी कुल सीट 36 हो गई. &nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;">बीजेपी और अकाली दल का वोट मिलाकर बीजेपी के पास 15 पार्षद थे. इसके बाद चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर ने बीजेपी को अपना वोट दिया. कुल मिलाकर भारतीय जनता पार्टी को 16 वोट मिले. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और आप के पास 20 वोट थे.&nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;">ऐसे में सबको उम्मीद थी कि इंडिया गठबंधन बड़ी ही आसानी से जीत जाएगी. लेकिन जब मेयर चुनाव का नतीजा आया तो रिजल्ट कुछ अलग ही था. रिजल्ट के अनुसार चुनाव में बीजेपी को कुल 16 वोट मिले थे. जबकि गठबंधन को केवल 12 वोट मिले. गठबंधन के 8 वोटें को काउंटिंग में शामिल ही नहीं किया गया. इतना ही नहीं ऐसा करने के पीछे कोई और वजह भी नहीं दी गई.&nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;"><sturdy>2. वोट कैंसिल नहीं होता तो आप-कांग्रेस का जीतना तय था&nbsp;</sturdy></p>
<p fashion="text-align: justify;">अब भले ही रिजल्ट में बीजेपी के जीत की घोषणा कर दी गई हो लेकर अगर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों के वोट को &nbsp;कैंसिल नहीं किया गया होता तो निश्चित तौर पर इंडिया गठबंधन की जीत होती.</p>
<p fashion="text-align: justify;"><sturdy>3. आठ मतपत्र अवैध क्यों करार दिए गए?</sturdy></p>
<p fashion="text-align: justify;">इस पूरे मामले के बाद पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए अपने एक बयान में कहा, ”मतपत्र में कुछ टिकमार्क या निशान नहीं होने चाहिए. वोटिंग के बाद जिन आठ मतपत्रों में ऐसे निशान पाए गए, हमने उनको अमान्य करार कर दिया. हालांकि ये कारण भी उन्होंने चुनाव परिणाम पर होने वाले हंगामे के बाद दिया. ”</p>
<p fashion="text-align: justify;"><sturdy>विपक्ष के आरोप भी जान लीजिए&nbsp;</sturdy></p>
<p fashion="text-align: justify;">8 वोट कैंसिल होने की कोई वजह नहीं मिलने के बाद विपक्ष ने हंगामा करना शुरू कर दिया. विपक्ष आरोप लगा रहा है कि इन मतपत्रों के वोट गिनने या अमान्य करार दिए जाने में धांधली हुई है. इतना ही नहीं आप पार्टी ने इस पूरे मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट जाने का फ़ैसला किया है.</p>
<p fashion="text-align: justify;">आम आदमी पार्टी के सांसद <sturdy>राघव चड्ढा</sturdy> ने इस पूरे मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा, "प्रीसाइडिंग ऑफिसर ने देशद्रोह किया है, उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए. मुकदमा चलना चाहिए. हम शिकायत करेंगे, कार्रवाई की मांग करेंगे बल्कि हम उनकी गिरफ़्तारी की मांग करेंगे."</p>
<p fashion="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/pictures/uploaded-images/2024/01/31/15373f2acf3cfdd96099474af63812911706684170305268_original.jpg" /></p>
<p fashion="text-align: justify;">वहीं कांग्रेस नेता <sturdy>राहुल गांधी</sturdy> ने भी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”जो बीजेपी मेयर चुनाव में पूरी दुनिया के सामने लोकतंत्र की हत्या कर सकती है, वो दिल्ली की सत्ता में बने रहने के लिए क्या करेगी यह कल्पना से परे है. वर्षों पहले आज ही के दिन गोडसे ने गांधी जी की हत्या की थी और आज ही गोडसेवादियों ने उनके आदर्शों और संवैधानिक मूल्यों की बलि चढ़ा दी.”</p>
<p fashion="text-align: justify;">पंजाब के मुख्यमंत्री <a title="भगवंत मान" href="https://www.abplive.com/subject/bhagwant-mann" data-type="interlinkingkeywords">भगवंत मान</a> ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा, ”कुछ दिन पहले हमने 26 जनवरी को <a title="गणतंत्र दिवस" href="https://www.abplive.com/subject/republic-day-2024" data-type="interlinkingkeywords">गणतंत्र दिवस</a> मनाया था. अब चुनावों में संविधान को कुचल दिया गया है. मैं ये कहूंगा कि बीजेपी ने मेयर चुनाव में लूटपाट की है.”</p>
<p fashion="text-align: justify;"><sturdy>विपक्ष के आरोपों पर पीठासीन अधिकारी का क्या कहना है</sturdy></p>
<p fashion="text-align: justify;">पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह ने इस पूरे मामले पर हो रहे हंगामे के बीच न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत की है. उन्होंने कहा कि मेयर चुनाव की प्रक्रिया काफी शांति से चल रही थी. हमारे पास एक सांसद को मिलाकर 36 वोट थे.&nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;">उन्होंने आगे कहा कि मतपत्र जारी करते वक्त आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों ने मतपत्रों पर निशान होने की चिंता जताई. हमने भी उनकी बात मानते हुए 11 नए मतपत्र जारी कर दिए.&nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;">अनिल मसीह आगे कहते हैं, ” अब वोट पड़ने के बाद जब मैंने नतीजों का ऐलान किया तो मैंने बीजेपी और आम आदमी पार्टी-कांग्रेस दोनों के ही पोलिंग एजेंट मतपत्र चेक करने की गुजारिश की थी. लेकिन इंडिया गठबंधन के लोग पेपर चेक करने की बजाय कूद पड़े. उन्होंने आकर बैलेट पेपर पर कब्ज़ा कर लिया, उसे फाड़ दिया.”</p>
<p fashion="text-align: justify;">पीठासीन अधिकारी के अनुसार बीजेपी ने नहीं बल्कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश की है.</p>
<p fashion="text-align: justify;"><sturdy>अब समझिए की चंडीगढ़ में मेयर का चुनाव कितना अहम है?</sturdy></p>
<p fashion="text-align: justify;"><sturdy>1.</sturdy> चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की राजधानी है और इस चुनाव आम आदमी पार्टी और कांग्रेस एक साथ मैदान में उतर रही है. अगर कांग्रेस और आप का गठबंधन प्रयोग सफल होता तो बीजेपी की मुश्किलें बढ़ जाती.&nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;"><sturdy>2.</sturdy> आम आदमी के पास सबसे ज्यादा पार्षद होने के बाद भी यह पार्ची नगर निगम में अपना मेयर नहीं बनवा पा रही है. पार्टी को कांग्रेस के साथ आने से उम्मीद थी कि इस बार वह आराम से इस चुनाव में जीत जाती.</p>
<p fashion="text-align: justify;"><sturdy>3.</sturdy> चंडीगढ़ में लोकसभा की एक सीट है. अगर कांग्रेस और आप का गठबंधन प्रयोग यहां सफल हो जाता, तो इसका असर बेशक लोकसभा सीट पर भी पड़ेता.&nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;"><br /><img src="https://feeds.abplive.com/onecms/pictures/uploaded-images/2024/01/31/9d5ca97ced433a9c4b8a816c970a6fcd1706684222213268_original.jpg" /></p>
<p fashion="text-align: justify;"><sturdy>जाते जाते चंडीगढ़ नगर निगम का बजट भी जान लीजिए &nbsp;</sturdy></p>
<p fashion="text-align: justify;"><a title="साल 2023" href="https://www.abplive.com/subject/new-year-2023" data-type="interlinkingkeywords">साल 2023</a>-24 में चंडीगढ़ नगर निगम का कुल बजट 2,176.4 करोड़ रखा गया था. बजट के अधिकांश पैसों का खर्च फाइबर ऑप्टिक्स और ठोस कचरा प्रबंधन पर करने का लक्ष्य रखा गया था.</p>
<p fashion="text-align: justify;">2022-23 में चंडीगढ़ नगर निगम का बजट 1725 करोड़ रखा गया था.&nbsp;</p>
<p fashion="text-align: justify;">चंडीगढ़ नगर निगम का मुख्य आय स्रोत केंद्रीय अनुदान, टैक्स और विज्ञापन है. एक रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ नगर निगम को केंद्र से हर साल करीब 550 करोड़ रुपए अनुदान के तौर पर मिलते हैं.</p>
<p fashion="text-align: justify;">&nbsp;</p>

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